एलपीजी, एलएनजी सप्लाई पर असर

समाचार एजेंसी एएफ़पी के अनुसार, भारत लिक्विफ़ाइड नेचुरल गैस (एलएनजी) का दुनिया में चौथा सबसे बड़ा और एलपीजी का दूसरा सबसे बड़ा आयातक देश है.

ये आयात मुख्य रूप से मध्य पूर्व से किए जाते हैं. हर्ष पंत के अनुसार, “भारत अपनी ज़रूरत का 60 प्रतिशत एलपीजी आयात करता है जिसका 90 प्रतिशत हिस्सा होर्मुज़ से होकर आता है.”

अल जज़ीरा की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि, क़तर एलएनजी का सबसे बड़ा उत्पादक देश है और उसने इसका उत्पादन रोक दिया है.

ब्लूमबर्ग के मुताबिक़, भारत मध्य पूर्व से अपनी ज़रूरत का अधिकांश एलपीजी और दो तिहाई एलएनजी ख़रीदता है. क़तर भारत का सबसे बड़ा एलएनजी सप्लायर है. क़तर, दुनिया में एलएनजी का सबसे प्रमुख उत्पादक देश है.

कुछ रिपोर्टों के मुताबिक़ क़तर ने अपना उत्पादन रोक दिया है.

दरअसल, क़तर दुनिया के लगभग पांचवें हिस्से की एलएनजी का आपूर्तिकर्ता है और इसमें रास लाफ़ान गैस फ़ील्ड का बहुत बड़ा योगदान है. इसे क़तर का ‘क्राउन ज्वेल’ भी कहा जाता है, जिस पर ईरान ने पिछले दिनों बड़ा हमला किया था और जिसकी वजह से इसे भारी नुक़सान पहुंचा है.

इन सब हालात में, भारत में कंपनियों के लिए लिक्विफ़ाइड नेचुरल गैस (एलएनजी) की औद्योगिक आपूर्ति में 20 प्रतिशत की कटौती की पहले ही घोषणा कर दी है.

भारत सरकार के पेट्रोलियम मंत्रालय ने पहले कहा था कि घरों, परिवहन क्षेत्र और एलपीजी उत्पादन के लिए प्राथमिकता दी जाए.

हर्ष पंत का कहना है कि पहले ईरान और अब अमेरिका के ब्लॉकेड से हॉर्मुज़ से एनर्जी परिवहन का मुद्दा और जटिल हो गया है और इससे चीन, भारत, जापान, दक्षिण कोरिया पर सबसे अधिक असर पड़ने वाला है.